हमारे पूर्वज ऐसा क्या खाते थे, जो नही पडते थे कभी बिमार!

हमारे पूर्वज ऐसा क्या खाते थे, जो नही पडते थे कभी बिमार!

हररोज ह्म देखते हैं की कोई केंसर से पीड़ित हैं, किसी को डयबेटीज हुआ हैं, किसी को हमेशा सर्दी रहती हैं, कोई बार बार बीमार पड़ता हैं, पहले के जमाने मैं भी यह बीमारिया थी. लेकिन बहोट ही कम मात्रा मैं, ब्लड प्रेशर, जॉइंट पेन, शुगर जैसी बीमारिया तो होती ही नही थी, सुबह, डोपेहर और रात को क्या खाना छाईए, और क्या नही खाना चाहिए यह सोचकर और जानकार पहले रसोईघर मैं खाना बनता था, जो आजकल पिज़्ज़ा और बर्गर ने जगह ले ली हैं, तो बीमारिया काफ़ी फैल गयी हैं.

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तो सवाल यह हैं की पुराने ज़माने के लोग ऐसा क्या खाते थे, जो कभी बीमार ही नही पड़ते थे.
इसका बहुत ही आसान और एकदम सस्ता ह्ल हैं, जो चीज़े हमारे रसोईघर मैं रहती हैं, वोही सबसे बढ़िया दवाई हैं हमारे बिमारिओ क़ी.

इसका पूरा श्रेय हमारे ऋषिमुनि शुश्रुत और बागभट्टजी को जाता हैं जिन्होने आयुर्वेद जैसी महान औषधियोंकि खोज की, जिस का साइड इफेक्ट लगभग शून्य के बराबर हैं अगर सही तरीके से और नियमित रूप से किया जाए तो. उन्होने यह साविढ़ किया था की इंसान की बीमारियोंके कारण हैं कफ, बात और पित्त का असंतुलन होना. जब यह तीन चिज़े हमारे शरीर की बिगड़ जाती हैं तो सारी बीमारियोंका कारण बनती हैं.

एक बात ध्यान मैं रखें की खाना खाने से पहले आधा घंटा, खाना खाते वक़्त और खाना खाने के बाद एक घंटे तक पानी कभी भी नही पीना चाहिए,

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जो बात की बीमारियाँ हैं जैसे की जॉइंट पैन, याने घुटने मे दर्द, कमर मैं दर्द जैसी.
हमारे शरीर मैं बात का प्रभाव सबसे ज़्यादा रहता हैं सुबह मैं, तो इसका संतुलन बनाए रखने के लिए हमे हर रोझ रूबाह के वक़्त मैं “फल” या फिर फ्रेश फलोँके रस याने “फ्रेश फ्रूट ज्यूस” का इस्तेमाल करना चाहिए. लेकिन कोशिश कीजिए के आप ज्यूस की बजाए फल ही खाए क्योंकि उससे हमे फायबर की मात्रा अधिक मिलती हैं.

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सबसे ज़्यादा परेशानी और बीमारियाँ देता हैं वो हैं पित्तदोष, दोपेहर को हमारा पित्त बहोत ज़्यादा बढ़ता हैं, हमारे शरीर मैं खाना पचाने के लिए पित्ताशय मैं अम्ल बनता हैं, अगर हम सही समय दोपेहर का खाना नही खाते हैं तो उसका असर काफ़ी तिव्र होकर हमे नुकसान देता हैं, इसीलिया कहा जाता हैं की दोपेहर खाना याने “लंच” एक राजा की तरह होना चाहिए, याने भरपेट खाना खाना चाहिए, उसमे एक तरीका ऐसा करें की भरपेट खाना खाने के साथ ही दोपेहर की सब्ज़ियों मैं जीरा और आज़माईन का उपयोग ज़रूर करे, इसी के साथ, गर्मी के मौसम मैं छाज़ याने बटर मिल्क का सेवन करें. यह करने से आपके के शरीर का पित्त दोष संतुलित रहेगा.

जो लोग घर से बाहर रहते हैं , जिन्हे मेस या होटेल मैं खाना पड़ता हैं वोह हमेशा अपने साथ आज़माईन पॉकेट मैं रखें, और खाना खाने के बाद एक चुटकी खाया करें.

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रात मैं हमारा कफ दोष बढ़ने लगता हैं, कफ को संतुलित करने का सबसे आसान और सस्ता त्तरिका हैं, वो हैं गूड, हर रोज रात का खाना खाने के बाद गुड खाना चाहिए, तो आप सर्दी, जुकाम, खाँसी से बच सकते हैं.
कफ को संतुलित रखने का और एक तरीका हैं वो यह हैं की सब्जी मई आप तोड़ा सा सौंठ / आद्रक मिलाइए. यह भी अच्छा काम करता हैं. लेकिन गुड बेहतर हैं.
खाने के बाद सौफ़ खाए, सौफ़ एक अच्छी कफ नाशक औषधि हैं.

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तो याद रखे
१) खाने से पहले आधा घंटा, खाना खाते वक़्त और खाना खाने के एक घंटे तक पानी नही पिए
२) सुबह भर्पुत्र फल खाएँ
३) दोपहर के सब्जी मैं आजवाइन का इस्तेमाल करें
४) रात का खाना खाने के बाद गुड, सौंफ ज़रूर खाए.
५) मैदे की चिज़े मत खाएँ.

हमेशा ताज़ा खाना ही खाएँ .

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*चेतावनी – इस वेबसाइट पे लिखी सभी जानकारी अलग अलग इन्टरनेट माध्यम से हासिल की गयी हैं,

कृपया पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले.

 

 

 

 

 

 

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