हामारा दिमाग आख़िर हैं क्या? और उसकी ताकद कैसे बढाए? Part 01

हमारे पूर्वज क्यो हमसे ज़्यादा होशियार थे? क्योंकि उन्होने दिमाग़ की ताकद को पहचाना था, और उसका सही उपयोग किया था .

क्या आपने कभी सोचा हैं कि जो खोजकर्ते हैं ऊनका दिमाग हमसे तेज क्यों चलता हैं? हमारे जो पूर्वज थे उन्होने किसी मॉडर्न तकनीक ना होने के बावजुद भी नई नई खोजे कैसे कि थी? कैसे अपने कम आयू मै ही जीवन का सार लिखा था? बिना किसी मॉडर्न तकनीस से कैसे हमारे आचार्य सुश्रुत और वागभट्ट जी ने हर पौधो और पत्तों पे प्रयोग कर के आयुर्वेद की रचना कि थी? कैसे दुनिया का पेहला ऑपरेशन आचार्य सुश्रुत ने हजारो साल पहले किया था? कैसे आर्यभट्ट जी ने सिर्फ अपनी उमर के  १९ वि आयू में ही  पुरे ब्रह्मन्ड का अभ्यास किया था? याहातक की उन्होने पृथ्वी से लेकर हर ग्रेह का अचूक माप, उसका आकार निकाला था? कैसे उन्होने भूमिती और बीजगणित की खोज कि थी? कैसे हमारे संत ज्ञानेश्वर ने कम उमर मे जीवन का सार शास्त्रोके आधार पर लिखा था? कैसे हमारे पूर्वज सिर्फ हात कि नाडी कि परीक्षा कर आपने क्या खाया हैं याहा से लेकर आपको क्या क्या बिमारिया हैं यह बताते थे? ऐसे बहोत सारे शास्त्रज्ञ और संत हो चुके हैं हमारे भारत मै, पुरी दुनिया यह समझती थी कि दुनिया सरल हैं या फिर चौकोनी हैं, लेकिन सिर्फ भारत के ऋषीमुनीयोंने सिद्ध किया था कि दुनिया गोल हैं , चारो बाजू ब्राह्मन्ड है.

इतनाही नही बलकी शस्त्रक्रिया, विमान, रॉकेट, गणित, आयुर्वेद, योगा, टेलिफोन, वैदिक मॅथ्स, धरती के चुंबकीय आधार पर बना वास्तुशास्त्र , मंत्रोका सही उच्चारण, आर्किटेक्चर,  ग्रहोंका ग्यान ई. और अनेक चिजे, सब याने कि सबकुछ कि खोज भारत मै हि हुई हैं.. हमारे ऋषीमुनियोने बहोत हि मेहनत और अपनी पुरी आयु एकेक खोज पे निछावर कर के हर बारीक चिजोंका अभ्यास किया, और पुरी दुनिया को यह ग्यान दिया, जीसका हमे बहोत गर्व होना चाहिए, लेकिन इन सब खोजोंके पहले एक खोज हुई थी और वह थी मेडिटेशन याने की ध्यान… हमारे सभी ग्यानी पूर्वज रोज ध्यान किया करते थे. उन्होने अपना दिमाग पुरी तराह खोल दिया था, इसिलिये वह ब्राह्मन्ड तक भी पोहोच पाते थे.

हमारे पंडितो और ऋषीमुनियोन्को पता था कि हमारे दिमाग कि ताकद क्या हैं, और हम कैसे उसे कंट्रोल कर सकते हैं? आज यह मेडिटेशन कि वाहवाही पुरे दुनिया मैं चर्चित हैं, सभी पाश्चात्य लोग हमारे मेडिटेशन तक्निक सिखने के पीछे पडे हैं, क्योंकी उन्होने उसका जबरदस्त अनुभव लिये हैं और सिद्ध किया हैं कि दिमाग कि ताकद बढाने के लिये मेडिटेशन के आलावा और कोई भी चीज जल्दी काम नही करती हैं… हमारे देश मैं एक काहावत हैं, सिर सलामत तो पगडी पचास… सबकुछ अपने दिमाग मैं हैं. और इसे कंट्रोल करना हमारे हाथ में हैं!

हमारे शरीर मैं 7 चक्र हैं , और सिर्फ मेडिटेशन, ध्यान से हि वह ऍक्टिवेट होते हैं

क्यो और कैसे काम करता हैं मेडिटेशन?

हमारे शरीर के अंदर और बाहर ऐसा कोई भी भाग नही हैं जो की काम का नही हो, हर चीज बहोतही मेहेत्वपूर्ण हैं, लेकिन ऊन सबको कंट्रोल करने वाली चीज हैं हामारा दिमाग, जबतक दिमाग चल रहा हैं तबतक हामारा पुरा शरीर उसके अंडर काम कर रहा हैं, मानो कि यह हमारे शरीर का प्रधानमंत्री हो, अगर इसका कंट्रोल छुट जायेगा तो हम क्या देख रहे हैं? क्या बोल रहे हैं? क्या सून रहे हे? कुछ समझ नही आयेगा. तो दिमाग हि भगवान हैं जो इस शरीर को चला रहा हैं…
हम जो कुछ भी नयी चिजें सिंखते हैं, समझते हैं, वह सारी चिजें हमारे दिमाग मैं न्यूरॉन कनेक्शन से कनेक्टेड हैं, और यह ट्रीलिअन्स में होती हैं, अब आप ट्रीलिअन्स को कैसे नापेंगे?

हमे समझ में भी नही आयेगी कि दिमाग कि यह पॉवर कैसे नापनी चाहिए? लेकिन हमारे ऋषीमुनियोने उसका प्रमाण दिया हैं कि अगर सब न्यूरॉन्स को अगर हम एकसाथ जोडे, तो यह धरती का कम से कम तीन चक्कर लगाएगी, कम से कम 3 चक्कर, इतनी बडी वायर बनेगी, इतनी क्षमता हमारे दिमाग कि हैं, लेकिन ऊन सभी न्यूरॉन्स का हम इस्तेमाल कर पायें ऐसी क्षमता हमारे पिढी मै नही हैं, हम वाहातक पोहोच हि नही पाते जहातक हमारे पूर्वज, खोजकर्ता पोहोच पाते थे. क्योंकी हम ऊस दिशा मै जाना हि नही चाहते हैं… हम लगे हुए हैं एक दुसरे कि टांग खिंचने मैं… लेकिन एक दुसरे के आगे बढने कि क्षमता हमारे पास नही हैं!

क्यो नही हैं? क्योंकी हमारे दिन कि सुरुवात से लेकर हमारे काम करने कि दिशा बहोत हि गलत हैं, हम जी रहे हैं क्योंकी हम जिंदा हैं, सिर्फ एकेक दिन काट रहे हैं, लेकिन उस हर एक दिन का सही इस्तेमाल हम नहीं कर पा रहे है , जीवन का कुछ उद्देश हमारे पास नही हैं, हम ऍक्सेप्ट हि नही करना चाहते कि हमसे अच्छा काम और किसिने किया हैं, और हमारे पूर्वज जिन्होने यह सब खोजे कि वह बेवकुफ थे, हम ईसी अधारपर जी रहे हैं.
हामारा दिमाग अगर सही दिशा मै चले तो हम भी बहोत सारा यश हासिल कर सकते हैं,

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कैसे करें? 

दिमाग को तेज करने का सबसे बडा और एकमेव फास्ट रोड हाय वे हैं, जो कि हैं “मेडिटेशन

मेडिटेशन, ध्यान क्या हैं?

मेडिटेशन याने की रिलॅक्सेशन, दिमाग को रिलॅक्स करना ताकी आगे का काम हम फास्ट कर सके.

मेडिटेशन मतलब किसी एक ही चीज का विचार करना नही, बलकी मेडिटेशन मतलब किसी भी चीज का विचार नही करना.
क्या क्या दिमागी फायदे होते हैं मेडिटेशन , ध्यान लगाने से?

– दिमाग को शांत करता हैं

– काम पर कोंसेंट्रेशन बढता हैं

– हमारे दिमाग के बंद हुए दरवाजे खोलता हैं

– एक दुसरे के साथ कम्युनिकेशन, संवाद अच्छा होता हैं

– दिमाग में बसी निगेटीव्हीटी हटाता हैं

– मानसिक घाव तुरंत ठीक करता हैं

– लोगों से अच्छि बातें तुरंत सिख सकते हैं

– आपके अंदर छुपी कला बाहर अति हैं, आप उसमें माहिर हो सकते हो

– आपको नये नये आयडियास् आने लगते हैं

– आप खूष रेहने लगते हो

– आपकी बडी समस्याए भी छोटी लगने लगती हैं

– आपका दिमाग तेज हो जाता हैं

– मेमरी बढ़ाता है

– सब के सामने बात करने में शर्म आती हैं तो वह बंद हो जाती हैं, मतलब कॉन्फिडन्स बढ जाता हैं

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क्या क्या शारीरिक फायदे होते हैं मेडिटेशन से?
– ब्लड प्रेशर कंट्रोल मी रेहता हैं

– प्रतिकार शक्ती बढता हैं

– चेतना शक्ती बढाता हैं

– एनर्जी लेव्हल को बढता हैं

– हमारे सप्ने हकीकत मै बद्दलने मै मदत करता हैं

– जिने कि सही दिशा मिल जाती हैं

– अपने काम में यश मिलना संभव हैं
कैसे करें मेडिटेशन?

1) सुखासन, पद्मासन मै पालथी मार के बैठे,

2) आँखे हलके से बंद करिये

3) अंदर और बाहर होनेवाली श्वासोपे कोंसेन्ट्रेट करिये, उनको मेहसुस किजीए

4) अहिस्ता अहिस्ता आपके दिमाग मी आनेवाले खयाल पुरी तरहासे बंद हो जाएंगे , आपको हलका मेहसुस होने लगे गा.

5) ईसी अवस्था मै कम से कम 15 मिनिट से लेके आप जितनी समय चाहो बैठ सकते हो.

6) जब आँखे खोलनी हो अपने दोनो हाथोंको रगडके उन्हे अपनी अंखो पे रखीये और अहिस्ता से आँखे खोलीये.

मेडिटेशन करने का योग्य समय:-

यू तो आप मेडिटेशन दिनभर मै कभी भी कर सकते हैं, लेकिन सबसे अच्छा और सही समय हैं सुबह  के 4.00 – 5:30 बजेतक का समय,

शास्त्रोमे लिखा गया हैं की हमे रात को 9 बजे से पहले सोना चाहिए, और 3:30 बजे उठना ही चाहिए, उठने के बाद तकरीबन 1 लिटर पानी पिकर दिनचर्या खतम करके 4:00 बजे ध्यान मै बैठना सबसे उचित समय हैं.

दोस्तो यह हामारा पेहला भाग यहा खतम होता हैं, आगे के भाग में जानेंगे कि और कौन से तरिके हैं दिमाग को तेज करने के लिये, किस प्रकार का खाना खाये, और किस प्रकार के योगासन और मंत्रोच्चरण करने चाहिए.

To be continued…

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