हमारे पूर्वजो ने भारत को और पूरी दुनिया को क्या दिया? पढ़कर आपका सीना गर्व से ५६ इंच चौड़ा हो जाएगा. एकबार पढ़ना शुरू किया तो आप रुकोगे नहीं. (PART 01)

आइंस्टाइन ने कहा था की ,”We owe a lot to the Indians, who taught us how to count, without which no worthwhile scientific discovery could have been made.”

भारत ने दुनिया को बहोत कुछ दिया हैं, इतना की अगर वह कुछ भी खोज नहीं करते तो शायद आज दुनिया इतनी तरक्की नहीं कर पाती।

१) दुनिया का सबसे पहला विश्वविद्यालय – तक्षशिला

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भारत ने दुनिया को सबसे पहला विश्वविद्यालय दिया, तक्षशिला विद्यालय, भारत के वायव्य भाग में, 700 BC से भी पहले, यह विद्यालय बनाया गया, यहापर ३०० भाषणवर्ग, प्रयोग शाला, पुस्तकालय, खगोल शास्त्र के अभ्यास के लिए सबसे ऊँची वेधशाला, यहापर १०,००० से भी ज्यादा विद्यार्थी और २०० प्राध्यापक हो गए थे, अर्थशास्त्र के जनक चाणक्य   भी इसी विद्यालय से थे, बादमे वह इसी विद्यालय में पढ़ाते थे.

२) आर्यभट्ट :

जन्म : ४७६ AD
मृत्यु: ५५० AD

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जहांपर Babylonians शून्य की जगह “एब्सेंट”याने ‘अनुपस्थित अंक” लिखते थे, वहापर भारत मैं अंकगणित में शून्य का इस्तेमाल होता था, जहाँपर सारी दुनिया ९ अंक पे अटकी थी वहासे हमारे “आर्यभट्ट” जी ने शून्य की खोज और उसका उपयोग करना सिखाया और पूरी दुनिया की मुश्किले ही हल कर दी,  और यह खोज उन्होंने की अपने जीवन की सिर्फ १६ वि आयु मैं .

इतना ही नहीं आर्यभट्ट ने अपने पुरे जीवन मैं संपूर्ण अंकगणित, सम्पूर्ण बीजगणित, संम्पूर्ण खगोलशास्त्र और त्रिकोणमिति के ३३ नियम भी दिए.
कुपरनिकस ने सिद्धान्त किया था की पृथ्वी गोल हैं और अपनी जगह घूमती हैं, लेकिन इससे १००० वर्ष पहले ही आर्यभट्ट जी ने यह बात साविध की थी, आर्यभट्ट ने अपने सूत्रोंसे यह सविध किया एक साल मतलब ३६५.२९५१ दिन होते हैं,

 

३) CHESS शतरंज

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समय – C.280- 550 CE भारत तो बुद्धिमानोंका ही देश था, तो बुद्धि को चालना देने वाले खेल भी कैसे पीछे रहते, शतरंज खेल का निर्माण पूर्व भारत मैं हुआ था, पहले इसे चतुरंग कहते थे . इसके हजारो सालो बाद यह खेल १५/१६ वि सदी मैं यूरोप में गया और वहापर काफी लोकप्रिय हुआ

4) BUTTONS

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२००० BCE मैं इंडस वैली सभ्यता मैं सजावटी बटन सागर की कौड़ी याने SEASHELLS से बनाये जाते थे, बटन सिर्फ गोल ही नहीं बल्कि तिकोनी और चौरस आकर के भी थे, और उनमे सीने के लिए छेद भी बनाये जाते थे.

५) चाणक्य (कौटिल्य)

Born: 371 BC, 

Died: 283 BC

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Photo from Daily Bhaskar

बहोत सारे लोग इतना ही जानते है की चाणक्य याने कौटिल्य बहोत ज्ञानी थे, उनका सपना था अखंड भारत,

 लेकिन क्या आप जानते है की चाणक्य यह भारत के सबसे पहले क्रांतिकारक थे, अगर उस समय चाणक्य ना होते तो शायद आज हमारा देश क्या हिन्दू धर्म भी ना रहता, जब दुनिया जितने चलने वाले अलेक्जांडर दी ग्रेट भारत में आया , तब भारत अलग अलग राज्यो में बटा हुआ था, एक विदेशी भारत मै आया यह सूनकर अनेक राजाओने उसका स्वागत किया, लेकिन एक विदेशी भारत सेना लेकर आया हैं आया है यह सुनकर ही आचार्य चाणक्य ने नजदीकी राज्यो में जाकर भारत एक होकर युद्ध के लिए तैयार हो जाए, और सबसे पहले सिर्फ अपनी अपनी राज्योकी सीमा के साथ साथ भारत की सीमा को भी रक्षण करे, ऐसी मांग की, लेकिन लेकिन अपने ऐशोआराम में मस्त डूबे हुए राजा ने  उसकी एक ना मानी , और चाणक्य को हर जगह से अपमानित होकर निकलना पड़ा, लेकिन उन्हें इस बात की फ़िक्र नहीं थी, उनके सामने देश को बचने की चिंता थी, और अखंड भारत का सपना था. तबतक अलेक्जांडर ने पर्शिया से होते हुए भारत पर हमला बोल दिया था, और एक एक राज्य जीतता चला गया.

उसके बाद चाणक्य ने अपने ३ प्रिय शिष्य भद्रभट्ट, पुरुष दत्त, और चंद्रगुप्त को लेकर पुरे भारत के राज्य में जा जाकर सब भारत के राज्योंको एक किया और जो पूरी दुनिया मैं नहीं हुआ था वोह कर दिखाया, चाणक्य ने ऐसा दांव बिछाया के  एलेक्जेन्डर को भारत से भगा दिया, उसके बाद चाणक्य खुद राजा बन सकते थे , लेकिन उन्होंने अपने शिष्य चंद्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया और मौर्या साम्राज्य की स्थापना की , और खुद निचे मंत्री बनकर काम किया, इतनाही नहीं चाणक्य ने बहोत आगे की सोच रख के और एलेक्जेन्ड़र दोबारा ना हमला करे इसीलिए एलेक्जेन्ड़र के निकट रहनेवाले Seleucus की बेटी से चंद्रगुप्त मौर्य की शादी करा दी, और उनके देश भारत से व्यापार करे यह अनुबंद भी करवा लिया.

अपने पुरे अनुभव के बाद चाणक्य ने अनेक ग्रन्थ लिखे उसमे से सबसे महान 3 ग्रन्थ थे,

अर्थशास्त्र , नीतिशास्त्र और चाणक्यनीति

उन्होंने चाणक्यनीति जैसा ऐसा ग्रन्थ लिखा जिसका हर एकेक सूत्र हर इंसान के लिए इतना उपयोगई है, जबतक पृथ्वीपर मान का वास्तव्य रहेगा तबतक मानवजाति के लिए उनके सूत्र काम में आएंगे. चाणक्यनीति अनेक देशोमे अनेक भाषाओंमे आज प्रसिद्ध हैं .

६) चरक, सुश्रुत और वाग्भट्ट

आयुर्वेद पे पूरा अभ्यास किया और दुनिया को एक नया वरदान दिया, दुनिया की सबसे पहली सर्जरी
जन्म : ८०० इसविसन पूर्व भारत

यु तो आयुर्वेद याने पौधों और पत्तोंसे इलाज हमारे देश मैं पहले से चला आ रहा है, लेकिन उसपर और भी ज्यादा अभ्यासकर चरक, सुश्रुत और वाग्भट्ट जी ने आयुर्वेद को बहोत ही बड़े मुक्काम पे लाके खड़ा किया,

चरक:

चरक संहिता ग्रन्थ लिखा, उसमे रोग नाशक और रोगनिरोधक आयुर्वेदिक चड़िबुटियोंके बारेमे वर्णन है, तथा चंदी, पारा, सोना और लोहा इन धातुओंके भस्म और उनका उपयोग सपने शरीरस्वास्थ के लिए कैसे किया जाये इसकी खोज की.

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सुश्रुत :

यह एक महान चिकित्साशास्त्री थे, इन्होंने दुनिया मैं सबसे पहले सर्जरी याने शस्त्रक्रिया की थी, सर्जरी करने के लिए वह १२५ प्रकार की उपकरणोंका इस्तेमाल  करते थे, उन उपकरणोमे ज्यादातर सुइयाँ, चिमटियां और चाकू जैसे उपकरण थे, उन्होंने ने शरीर के ३०० प्रकार के ऑपरेशन्स याने शस्त्रक्रिया की खोज की, जैसे मोतियाबिंदु, टूटी हुई हड्डियां जोड़ना, मानवी शरीर का अभ्यास करने के लिए सुश्रुत मरे हुए अदमियोंके शरीरपर अभ्यास करते थे, पूरी दुनिया को शस्त्रक्रिया करना हमारे भारत से सिख गया .

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वाग्भट्ट:

इन्होंने और भी आगे जाकर आयुर्वेद के बारे में अभ्यास किया, हर आयुर्वेद का सूत्र सिद्ध करने के लिये उन्हों ने हर एक सूत्र को सेकड़ो लोगोंपर प्रयोग किया.
चरक और सुश्रुत द्वारा लिखे सारे ग्रंथोंका अभ्यास कर शरीर के बारे में पूरा अभ्यास करके इन्होंने हे व्यक्ति की दिनचर्या कैसी होनी चाहिए, कब खाना चाहिए, कब पानी पीना चाहिए, कब उठना कहिये, कब सोना चाहिए, डायबेटीज, जोड़ोंके दर्द , केंसर ऐसे १०३ बीमारियोंपर अभ्यास किया,
वाग्भट्ट जी ने २ ग्रन्थ लिखे
१) अष्टांग संग्रह
इसके ६ भाग थे

सूत्रस्थानम्
शरीरस्थानम्
निदानस्थानम्
चिकित्सितस्थानम्
कल्पस्थानम्
उत्तरस्थानम्

२) अष्टांग हृदयम
इसके भी ६ स्थान थे
१) सूत्रस्थान (३० अध्याय)
२) शारीरस्थान (६ अध्याय)
३) निदानस्थान (१६ अध्याय)
४) चिकित्सास्थान (२२ अध्याय)
५) कल्पस्थान (६ अध्याय)
६) उत्तरस्थान (४० अध्याय)

इसमें दिनचर्या कैसी होनी चाहिए, क्या खाये, क्या ना खाये, सारी बीमारिया अदि मिलाकर ७१५० से भय ज्यादा सूत्र लिखे.

मानो हमारा शरीर क्या हैं? इसका पूरा अभ्यास हमारे ऋषिमुनियोंने कर के पूरी दुनिया को यह तोहफा दिया

 

७) सांप सीढ़ी का खेल याने मोक्षपट

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सांप सीढ़ी खेल को पहले मोक्षपट खा जाता था, भारत में  ब्रिटिश राज्य के दौरान यह खेल इंग्लैंड में लाया गया , और उसके बाद अमेरिका मैं १९४३ मैं यह खेल स्नेक & लेडर के नाम से जाना गया

८) भास्कराचार्य:

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७ वे शतक मैं, खगोल शास्त्र का मॉडल ब्रह्मगुप्त द्वारा विकसित  होने के बाद,
भास्कराचार्यजी ने नक्षत्र वर्ष, पृथ्वी की सूर्य पे परिक्रमा, और खगोलीय मात्रा क्या हैं इसका एकदम अचूक वर्णन किया.
देखिये, इन पाश्चात्य लोगोंके शोध करने के भी हजारो साल पहले ही हमारे ज्ञानी पंडितोंने क्या क्या खोजे की थी. लेकिन हमें स्कुल में सिर्फ पाश्चात्य लोगों के होशियारी के बारे में सिखाया जाता हैं? और हमारे पूर्वजोंको भुलाया जाता हैं. जब इतिहास ही गलत पढ़ाया जाये तो लोग सिखने के लिए विदेश में ही भागेंगे न.

इसी के साथ हमारा यह पहिला भाग समाप्त होता है, और भी ऐसी बहोत सारी महान हस्तियां हैं, भारत के महान योद्धा हैं, भारत के इतिहास के माहान राजा हैं, और अभि भी कुछ भारतीय हैं जिंहोने भारत का नाम उचा किया हैं, यह सब जानकारी हम आपके लिए लाते रहेंगे.
आप को यह जानकारी पढ़ के कैसा लगा यह कमेंट में बताइये, और इस पोस्ट को जरूर शेर कीजिये ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे पढ़ सके

 

 

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